Wednesday, 31 July 2019

राजस्थान: मॉब लिंचिंग पर उम्रक़ैद और ऑनर किलिंग के लिए फांसी की सज़ा का प्रावधान

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राजस्थान विधानसभा में ‘राजस्‍थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019’ और ‘वैवाहिक संबंधों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक 2019’ पेश किया गया. विधेयक में मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग को संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती अपराध बनाया गया है.

अशोक गहलोत. (फोटो: पीटीआई)

अशोक गहलोत. (फोटो: पीटीआई)

जयपुर: राजस्थान सरकार ने मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग पर रोकथाम के लिए सख्त सजा का कानून बनाया है. विधानसभा में रखे गए दो विधेयकों में इन दोनों अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाया गया है.

संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने राजस्‍थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019 और वैवाहिक संबंधों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक 2019 को सदन में पेश किया.

विधेयक के अनुसार, कथित सम्मान के लिए की जाने वाली हिंसा व कृत्य भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है और इन्हें रोकना जरूरी है.

मॉब लिंचिंग पर लगाम लगाने के मकसद से लाए गए विधेयक के अनुसार, भारत का संविधान समस्त लोगों को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता और विधियों के समान संरक्षण के अधिकार देता है. हाल में ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं, जिनके परिणामस्वरूप मॉब लिंचिंग के कारण व्यक्तियों की जीविका की हानि और उनकी मृत्यु हुई है.

जाति, समुदाय, परिवार और सम्मान के नाम पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की जाने वाली हत्या (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं पर रोकथाम के प्रयासों के तहत राजस्‍थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019 बीते मंगलवार को विधानसभा में पेश किया जिसमें ऐसी घटनाओं में पीड़ित की मौत पर दोषी को कठोर आजीवन कारावास और एक से पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि मॉब लिंचिंग के मामलों में पीड़ित के चोट लगने की स्थिति में दोषी को अधिकतम 10 साल तक का कारावास व तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा.

विधेयक के अनुसार, मॉब लिंचिंग की घटनाओं का षड्यंत्र रचने, षड्यंत्र रचने में शामिल होने या घटना में शामिल होने पर भी 10 साल जेल की सजा का प्रावधान होगा.

विधेयक के अनुसार, ‘मॉब’ से आशय दो या दो व्यक्तियों के समूह से है. वहीं ‘लिंचिंग’ से आशय धर्म, वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान, भाषा, आहार व्यवहार, राजनीतिक सम्बद्धता तथा नस्ल के आधार पर मॉब द्वारा किसी तरह की हिंसा करने, हिंसक कृत्य में सहायता करने, उसके लिए उकसाने या हिंसा के प्रयास आदि से है.

वहीं ऑनर किलिंग के लिए फांसी या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकेगी. जाति, समुदाय और परिवार के सम्मान के नाम पर शादीशुदा जोड़े में से किसी एक की जाने वाली हत्याएं गैर-जमानती होंगी. इसके अलावा पांच लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.

इस विधेयक में शादीशुदा जोड़े पर जानलेवा हमला करने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी.

उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को अपने निर्णय में इस संबंध में कानून बनाने की सिफारिश की थी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 16 जुलाई को बजट भाषण के जवाब के दौरान ‘मॉब लिंचिंग’ और ‘ऑनर किलिंग’ को रोकने के लिए कानून बनाने की घोषणा की थी.

‘ऑनर किलिंग’ और ‘मॉब लिंचिंग’ पर लगाम के मक़सद से लाए गए विधेयक: गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑनर किलिंग’ और ‘मॉब लिंचिंग’ पर लगाम लगाने के मकसद से विधेयक लाने का उद्देश्य इन अपराधों के तहत अंजाम दी जाने वाली हिंसा और आपराधिक धमकी के कुकृत्यों के लिए गंभीर रूप से दंडित करना है.

गहलोत ने ट्वीट के जरिये कहा कि राजस्थान विधानसभा में पेश किए गए ‘ऑनर किलिंग’ संबंधी विधेयक में इसे गैर-जमानती तो बनाया ही गया है, साथ ही दोषी को आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है.

उन्होंने कहा कि विधेयक में आरोपी को मृत्युदंड का भी प्रावधान है. इस विधेयक का उद्देश्य हिंसा और आपराधिक धमकी के ऐसे कृत्य के लिए कड़ी सजा देना है.

एक अन्य ट्वीट में गहलोत ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में पेश ‘मॉब लिंचिंग’ संबंधी विधेयक के लिए गैर-जमानती अपराध के साथ दोषी को आजीवन कारावास और 5 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसमें राज्य में ‘मॉब लिंचिंग’ रोकने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान है.

उन्होंने कहा कि ‘मॉब लिंचिंग’ के कारण लोगों की आजीविका का नुकसान होता है और भीड़ द्वारा लोगों को चोटिल कर दिया जाता है और उन्हें मार दिया जाता है. विधेयक का उद्देश्य इस बुराई को खत्म करना है और इसके खिलाफ विशेष अपराध बनाकर लिंचिंग से नफरत या उकसावे को फैलाने से रोकना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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