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Tuesday, 30 July 2019

एनजीटी ने पानी की बर्बादी को दंडनीय अपराध बनाने की मांग पर केंद्र से रिपोर्ट मांगी

एनजीटी में याचिका दायर कर कहा गया है कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं और पानी बर्बाद करने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए.

Tamilnadu-water-crisis_Chennai PTI Files

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पानी की बर्बादी को दंडनीय अपराध बनाने की मांग संबंधी एक अर्जी पर केंद्र से जल बचाने के बारे में की गई कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है.

एनजीटी ने कहा कि भारत में 33 फीसदी लोग खासकर ब्रश करते और नहाते समय बिना उपयोग के नल को खुला छोड़कर पानी बर्बाद करते हैं.

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने जल शक्ति मंत्रालय और दिल्ली जल बोर्ड को एक महीने के अंदर इस मामले पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

अधिकरण गाजियाबाद से भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी और एनजीओ ‘फ्रेंड्स’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

याचिका में कहा गया है, ‘देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं. उपयुक्त विनियमों या कार्ययोजना के अभाव में लाखों लीटर ताजा पेयजल बर्बाद हो रहा है. घरों और वाणिज्यिक परिसरों में फ्लश प्रणाली ताजा पानी बर्बाद होने की एक बड़ी वजह है क्योंकि एक फ्लश में 15-16 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है.’

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, हर दिन 4,84,20,000 क्यूबिक मीटर पानी बर्बाद हो जाता है और लगभग 163 मिलियन लोग कुछ ऐसे लोगों की वजह से साफ पानी पीने से वंचित रह जाते हैं, जो कीमती और पीने योग्य पानी बर्बाद करते हैं.

एक अध्ययन का हवाला देते हुए यह कहा गया कि भारत में तीन में से एक व्यक्ति नल खुला छोड़ने के कारण पानी बर्बाद करता है. नल से एक मिनट में पांच लीटर पानी निकलता है और एक शावर से प्रति मिनट 10 लीटर पानी बाहर निकलता है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा, ‘रोजाना तीन से पांच मिनट ब्रश करने के दौरान लोग लगभग 25 लीटर पानी बर्बाद करते हैं. जब कोई व्यक्ति साबुन या शैम्पू लगाता है तो उस समय 15-20 मिनट शावर चालू रखने के दौरान लगभग 50 लीटर पानी बर्बाद होता है. बर्तन धोने के दौरान लोग नल चालू रखते हैं, इसकी वजह से करीब 20-60 लीटर पानी बर्बाद होता है.’

उन्होंने कहा, ‘गांव में लोगों ने हैंडपंप और ट्यूबवेल होने के बाद भी गहरा बोरवेल करा रखा है और ये पानी बर्बाद होने के बड़े कारणों के रूप में उभर कर सामने आया है.’

वकील आकाश वशिष्ठ के जरिए दायर याचिका में कहा गया, ‘साफ पानी के दुरुपयोग के अन्य प्रमुख कारणों में कार की धुलाई, लगातार फर्श की धुलाई, शहरों और कस्बों में स्विमिंग पुल, चलन से बाहर हो चुकी वॉशिंग मशीन और डिशवॉशर का इस्तेमाल शामिल हैं.

आने वाले 2025 तक पानी की मांग 40 अरब क्यूबिक मीटर से बढ़कर 220 अरब क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की संभावना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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