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Friday, 30 August 2019

साल 2018-19 में 71,542 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी हुई: रिजर्व बैंक

रिजर्व बैंक द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018-19 में 71,542.93 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के 6,801 मामले सामने आए. साल 2017-18 में धोखाधड़ी की राशि 41,167.04 करोड़ रुपये थी.

Mumbai: A man walks past near the Reserve Bank of India Headquarters, in Mumbai, Monday, Nov. 19, 2018. RBI board meeting is being held today in Mumbai amid reports of rising tensions between the central bank and the government. (PTI Photo/Shashank Parade) (PTI11_19_2018_000076B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

मुंबई: देश में पिछले साल बैंकों द्वारा सूचित धोखाधड़ी के मामलों में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत वृद्धि हुई जबकि धोखाधड़ी की राशि 73.8 प्रतिशत बढ़कर 71,542.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकिंग क्षेत्र ने 71,542.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 6,801 मामलों को रिपोर्ट किया. इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 5,916 मामलों का था और इसमें धोखाधड़ी की राशि 41,167.04 करोड़ रुपये थी.

साल 2018-19 में में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले देखने को मिले. इसके बाद निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों का स्थान रहा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि धोखाधड़ी होने और बैंकों में उसका पता लगने के बीच की औसत अवधि 22 महीने रही है. वहीं बड़ी धोखाधड़ी के मामलों, यानी 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी के मामलों के होने और उनका पता लगने का समय औसतन 55 महीने रहा है.

इस दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की राशि 52,200 करोड़ रुपये रही है. सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले अग्रिम राशि से जुड़े रहे हैं.

इसके बाद कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. वर्ष 2018- 19 में कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी राशि कुल धोखाधड़ी के समक्ष मात्र 0.3 प्रतिशत रही है.

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि देश में चलन में मौजूद मुद्रा 17 फीसदी बढ़कर 21.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि घरेलू मांग घटने से आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत है.

बता दें कि आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 वित्तीय वर्षों में 2.05 लाख करोड़ रुपये की भारी धनराशि की बैंकिंग धोखाधड़ी के कुल 53,334 मामले दर्ज किए गए.

इससे पहले 2008- 09 में 1,860.09 करोड़ रुपये के 4,372 मामले सामने आए. इसके बाद 2009- 10 में 1,998.94 करोड़ रुपये के 4,669 मामले दर्ज किए गए. 2015- 16 में 18,698.82 करोड़ रुपये के 4,693 मामले और 2016- 17 में 23,933.85 करोड़ रुपये मूल्य के 5,076 मामले सामने आए.

ये आंकड़े इसलिए उल्लेखनीय हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में बैंक धोखाधड़ी के कई बड़े मामले सामने आए हैं. इनमें भगोड़ा आभूषण कारोबारी नीरव मोदी और शराब कारोबारी विजय माल्या से जुड़े मामले भी शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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