Monday, 12 August 2019

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में सीबीआई ने जानबूझकर विधायक का नाम नहीं लिया: वकील

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सीबीआई ने इस आरोप से इनकार किया है और कहा कि जांच अधिकारी ने मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ सबूत इकट्ठा किए हैं.

भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उन्नाव बलात्कार पीड़िता के वकील ने दिल्ली की एक अदालत को शनिवार को बताया कि पीड़िता के पिता की हत्या मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जानबूझकर भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई का नाम आरोपियों के रूप में नहीं लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी किए जाने की समयसीमा 45 दिन तय की थी और इसी के अनुपालन में दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति से अदालत के अवकाश पर जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने विशेष सुनवाई की और इस दौरान यह दलील दी गई.

सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक अशोक भारतेन्दु ने इस आरोप से इनकार किया और कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) ने मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ सबूत इकट्ठा किए हैं और उनकी ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था.

अदालत ने 2018 में कथित हमला और शस्त्र अधिनियम मामले में बलात्कार पीड़िता के पिता को फंसाने के मामले में आरोप तय करने के विषय पर 13 अगस्त के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

सीबीआई के आरोप पत्र में सेंगर और उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन अधिकारियों समेत 10 लोगों के नाम आरोपियों के रूप में है.

सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता की हत्या मामला भी अदालत के समक्ष आया. सीबीआई ने इस मामले में सेंगर और उसके भाई के नाम आरोपियों के रूप में शामिल नहीं किया है. सीबीआई ने कहा कि हत्या मामले में हालांकि आरोपपत्र दायर किया जा चुका है और जांच जारी है.

भारतेन्दु ने कहा, ‘यह नहीं कहा जा सकता है कि आईओ ने जानबूझकर मामले में आरोपी के रूप में विधायक और उनके भाई अतुल सिंह सेंगर का नाम नहीं लिए और आरोपियों का समर्थन किया. पूरी निष्पक्षता के साथ साक्ष्य एकत्र किए गए थे. उनकी ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था.’

लोक अभियोजक ने कहा, ‘अब तक, सीबीआई को विधायक के खिलाफ एक आरोपी के रूप में कुछ भी नहीं मिला है. यदि सुनवाई के दौरान एजेंसी को इन दोनों के खिलाफ कोई सबूत मिलता है तो एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जायेगा.’

बलात्कार पीड़िता और उनके परिवार के वकील धर्मेन्द्र मिश्रा और पूनम कौशिक ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने मामले की जांच समुचित ढंग से नहीं की.

मिश्रा ने कहा, ‘पिता को कथित तौर पर बुरी तरह से पीटा गया और इस कारण वह घायल हो गए और न्यायिक हिरासत में उनकी मौत हो गई. आईओ ने जानबूझकर दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए जिसमें से एक आरोप पत्र में हमला और झूठे आरोप तय करने का मामला था और एक अन्य में हत्या का मामला था.’

उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक और उनके भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर 19 वर्षीय पीड़िता के पिता पर हमला किया था और उसके खिलाफ एक झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

सुनवाई के दौरान न्यायालय को आईओ द्वारा बताया गया कि बलात्कार पीड़िता की मां और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए ठहरने की समुचित व्यवस्था की गई थी.

मामले में केंद्रीय एजेंसी ने जिन तीन पुलिस अधिकारियों के नाम आरोपियों के रूप में लिए हैं उनमें माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, उप निरीक्षक कामता प्रसाद और कॉन्स्टेबल आमिर खान शामिल हैं.

वे अभी जमानत पर हैं. अन्य आरोपियों में शैलेन्द्र सिंह, विनीत मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, शशि प्रताप सिंह और राम शरण सिंह शामिल हैं. बलात्कार पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी.

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