मोटर ह्वीकल संशोधन विधेयक को मंज़ूरी, नाबालिग द्वारा एक्सीडेंट पर अभिभावकों को होगी सज़ा - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Thursday, 1 August 2019

मोटर ह्वीकल संशोधन विधेयक को मंज़ूरी, नाबालिग द्वारा एक्सीडेंट पर अभिभावकों को होगी सज़ा

मोटर ह्वीकल संशोधन विधेयक में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधा के लिए अब अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी माना जाएगा. इसके लिए 25 हज़ार रुपये का जुर्माना या तीन साल की जेल की सज़ा का प्रावधान किया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: राज्यसभा ने देश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के मकसद से बुधवार को सड़क सुरक्षा के लिए कठोर प्रावधानों वाले मोटर ह्वीकल (संशोधन) विधेयक 2019’ को मंजूरी दे दी.

राज्यसभा ने विधेयक को चर्चा के बाद 13 के मुकाबले 108 मतों से पारित कर दिया. विधेयक पर लाए गए विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया.

विधेयक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के मकसद से काफी कठोर प्रावधान रखे गए हैं. किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बैठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसमें एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर भी जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है.

इसके अलावा तेज गाड़ी चलाने, बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने और बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर जुर्माना एवं निर्धारित अवधि के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाने के प्रावधान विधेयक में शामिल हैं.

किशोर द्वारा गाड़ी चलाते हुए सड़क पर कोई अपराध करने की स्थिति में गाड़ी के मालिक अथवा अभिभावक को दोषी माना जाएगा और वाहन का पंजीकरण भी निरस्त किया जाएगा.

शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दो हजार की बजाय 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा. वहीं हिट एंड रन के मामले में मौत होने पर 2 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा, जो पहले 25 हजार रुपये था.

इसके अलावा नाबालिग के वाहन चलाते समय हादसा होने पर अभिभावक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना और 3 साल की सजा का प्रावधान किया गया है. ऐसे मामलों में जुवेनाइल एक्ट के तहत केस चलेगा.

यह विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा में पारित हुआ था. किंतु विधेयक में टाइपिंग की कुछ मामूली गलतियों के रह जाने के कारण सरकार को उसे ठीक करने के लिए तीन संशोधन लाने पड़े. इन संशोधनों के कारण अब यह विधेयक फिर से लोकसभा में जाएगा.

उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मोटर यान संशोधन विधेयक के माध्यम से राज्यों के अधिकार में दखल देने का कोई इरादा नहीं है. इसके प्रावधानों को लागू करना राज्यों की मर्जी पर निर्भर है और केंद्र की कोशिश राज्यों के साथ सहयोग करने, परिवहन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाने और दुर्घटनाओं को कम करने की है.

गडकरी ने कहा कि विधेयक के प्रावधान 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं. इन सिफारिशों की संसद की स्थायी समिति ने भी विस्तार से जांच परख की और उसकी रिपोर्ट के आधार पर इन्हें विधेयक में शामिल किया गया है.

इस विधेयक में केंद्र सरकार के लिये मोटर वाहन दुर्घटना कोष के गठन की बात कही गई है जो भारत में सड़क का उपयोग करने वालों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा.

इस विधेयक में यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है.

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा, ‘राज्यों के अधिकार में कोई दखल नहीं दिया जाएगा. जो राज्य इसके प्रावधानों को लागू करना चाहते हैं वो करें, जो नहीं चाहते हैं वो नहीं करें. हमारा रुख सहयोग करने का रहेगा.’

गडकरी ने कहा कि वाहनों की खरीद की स्थिति में उसके पंजीकरण का काम डीलर को देने से राज्यों को राजस्व का कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि कर का पैसा सीधा राज्य सरकारों के खाते में ऑनलाइन पद्धति से जमा किया जाएगा. इस संबंध में कर की दर का निर्धारण भी राज्य अपने हिसाब से कर सकते हैं.

गडकरी ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष के साथ निजी निवेश की मदद से परिवहन क्षेत्र में व्यापक सुधार किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक बसों को संचालित करने की कोशिश कर रही है जो आम लोगों के लिए किफायती होने के साथ बहुत सुविधाजनक रहेगी.

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि परिवहन क्षेत्र में बहुत पैसे की जरूरत है. केंद्र और राज्यों के पास पैसे नहीं हैं. ऐसे में कम ब्याज पर निजी क्षेत्र से निवेश लाना होगा.

गडकरी ने कहा कि देश में सड़कों पर 14 हजार से अधिक ‘ब्लैक स्पॉट’ का पता चला है और इसके लिए 14 हजार करोड़ रुपये की परियोजना बनाई गई है. इसे विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक की मदद से लागू किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि सड़क सहित समूची परिवहन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए नई सड़क परिवहन नीति का प्रस्ताव है. इसके तहत परिवहन व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के अनुरूप बनाया जाएगा.

गडकरी ने कहा कि इसके तहत देश में पहली बार स्काई बस चलाने की योजना है. पर्यावरण हितैषी और सस्ती बस सेवा की शुरुआत दिल्ली के धौला कुंआ से हरियाणा के मानेसर तक चलाए जाने से होगी.

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सड़क हादसों के लिए सड़क निर्माण की खामियां जिम्मेदार हैं. इसके लिए उन्होंने सड़क बनाने वाली कंपनी और इंजीनियरों की जवाबदेही तय की जाएगी.

गडकरी ने स्वीकार किया कि बतौर मंत्री पिछले पांच सालों में उनकी एकमात्र नाकामी सड़क हादसों में कमी नहीं ला पाना है.

उन्होंने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद वह सड़क हादसों में उम्मीद के मुताबिक कमी नहीं ला पाए. इस संबंध में तमिलनाडु ने बहुत अच्छा काम किया है और इसका हम पूरे देश में अनुकरण करेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग सपने दिखाकर उनको पूरा नहीं करते, उन्हें जनता बदल देती है, लेकिन जो पूरा करते हैं उनको जनता दोबारा चुनती है.

गडकरी ने कहा कि देश में 22 लाख वाहन चालकों की कमी है. प्रशिक्षित वाहन चालकों की कमी को पूरा करने के लिए छोटे शहरों में ड्राइविंग ट्रेनिंग केंद्र खोले जाने की पहल की है. इसके लिए केंद्र सरकार राज्यों को प्रति केंद्र एक करोड़ रुपये अनुदान देगी.

विधेयक में किए गए प्रावधान

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सीट बेल्ट न लगाने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

  • हेलमेट नहीं होने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये का जुर्माना और तीन महीने तक लाइसेंस कैसिल कर दिया जाएगा.
  • आपतकालीन वाहनों (एंबुलेंस आदि) का रास्ता रोकने पर अब तक कोई जुर्माना नहीं है. विधेयक में इसके लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है.
  • बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. नए विधेयक में पांच हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है. यह गलती दोहराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या एक साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
  • अयोग्य होने के बावजूद गाड़ी चलाने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
  • तेज गाड़ी चलाने या रेस करने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे बढ़ाकर पांच हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है. इस अपराध को दोहराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या एक साल की सजा अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.

नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध पर अभिभावक या वाहन मालिक होंगे दोषी

नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध पर अब तक सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं है. विधेयक में अब इसके लिए अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी माना जाएगा. इसके लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना या तीन साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है. एक साल तक वाहन का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया जाएगा और नाबालिग को 25 साल का होने तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा.

शराब पीकर गाड़ी चलाना

पहली बार शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दो हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे दोहराने पर तीन हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है.

संशोधन के बाद पहली बार अपराध करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है और अपराध को दोहराने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना या दो साल महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

ट्रैफिक लाइट और नियमों का उल्लंघन, फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग और गलत तरीके से ओवरटेक करने पर अब तक एक हजार रुपये का जुर्माना और या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे दोहराने पर दो हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है.

नए विधेयक में इस अपराध के लिए पांच हजार रुपये का जुर्माना या छह से 12 महीने की सजा या दोनों का प्रावधान किया गया है. दोबारा यही गलती होने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल या दोनों का प्रावधान किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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