Thursday, 29 August 2019

कश्मीर में पाबंदियों को लेकर इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारी को ड्यूटी पर लौटने को कहा गया

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दमन और दीव के कार्मिक विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर लिया जाता है, तब तक उन्हें निर्धारित काम करने होंगे.

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कन्नन गोपीनाथन. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में लगी पाबंदियों को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देने वाले केरल के कन्नन गोपीनाथन को उनका इस्तीफा स्वीकार किये जाने तक उन्हें तुरंत अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने और काम करने के लिए कहा गया है.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक गोपीनाथ को इस संबंध में दमन और दीव के कार्मिक विभाग से एक नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के नियमों का हवाला दिया गया है, जिसके तहत किसी सरकारी अधिकारी का इस्तीफा तभी प्रभाव में आता है जब उसे स्वीकार किया जाता है.

नोटिस में आगे लिखा है, ‘इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि जब तक आपके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं ले लिया जाता है, तब तक आप तुरंत अपनी ड्यूटी ज्वाइन करें और आपके लिए निर्धारित किए गए जिम्मेदारियों को पूरा करें.’

नोटिस गेस्ट हाउस में पहुंचाया गया था जहां गोपीनाथन ठहरे थे, क्योंकि वह अब सिलवासा में नहीं थे, जहां वह तैनात थे. आईएएस अधिकारी ने 21 अगस्त को अपना इस्तीफा सौंप दिया था और पीटीआई को बताया कि उन्हें इस नोटिस के बारे में जानकारी नहीं थी.

कन्नन गोपीनाथ ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि वे ऐसी स्थिति में काम नहीं कर सकते हैं जहां लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता का दमन करने के लिए नौकरशाही मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह एक तरह से अघोषित अपातकाल है.

द वायर से बात करते हुए गोपीनाथन ने कहा था, ‘यह यमन नहीं है, यह 1970 के दशक का दौर नहीं है जिसमें आप पूरी जनता को मूल अधिकार देने से इनकार कर देंगे और कोई कुछ नहीं कहेगा.’

उन्होंने कहा था, ‘एक पूरे क्षेत्र में सभी तरह के प्रतिबंधों को लगाकर उसे पूरी तरह से बंद किए हुए पूरे 20 दिन हो चुके हैं. मैं इस पर चुप नहीं बैठ सकता हूं चाहे खुल कर बोलने की आजादी के लिए मुझे आईएएस से ही इस्तीफा क्यों न देना पड़े और मैं वही करने जा रहा हूं.’

बता दें कि, 2012 में आईएएस में शामिल होने वाले गोपीनाथन अरुणाचल-गोआ-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश कैडर से जुड़े हुए हैं.

गोपीनाथ के इस्तीफे के बाद, यह कहकर उनकी राय को बदनाम करने की कोशिश की गई कि उनके खिलाफ कदाचार के आरोप हैं. गोपीनाथन ने द वायर को बताया कि गड़े मुर्दे उखाड़कर इस्तीफा देने के उनके फैसले के प्रभावों को दबाने की कोशिश की जा रही है.

आईएएस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पहले ही कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया था जिसमें कदाचार के आरोप लगाए गए थे.

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