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Saturday, 7 September 2019

नमक-रोटी की ख़बर करने वाले पत्रकार की रोज़ी-रोटी की कहानी

साक्षात्कार: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्‍चों को नमक और रोटी दिए जाने की ख़बर करने के कारण पत्रकार पवन जायसवाल के ख़िलाफ़ ज़िला प्रशासन ने केस दर्ज करा दिया है. द वायर से विशेष बातचीत में पवन ने इस मामले और अपने पत्रकारीय जीवन से जुड़ी चुनौतियों को साझा किया.

पत्रकार पवन जायसवाल.

पत्रकार पवन जायसवाल.

बीते 23 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील योजना के तहत बच्‍चों को नमक और रोटी दिए जाने का मामला सामने आया था. इस मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था.

अपने अखबार जनसंदेश टाइम्स के लिए इसकी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल ने यह वीडियो बनाया था. मिड-डे मील के मेन्यू की बजाय बच्चों को नमक-रोटी बांटने के दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने पवन के खिलाफ भी कई धाराओं में मामला दर्ज करा दिया है. इस पूरे विवाद पर पवन जायसवाल से विशाल जायसवाल की बातचीत.

आपने मिर्ज़ापुर के एक प्राथमिक स्कूल में मिड-डे मील में बच्चों को नमक-रोटी दिए जाने की स्टोरी की. इस पर प्रशासन ने आपके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है. यह पूरा मामला क्या है?

22 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे मेरे सोर्स का फोन आया. उसने मुझे एक सूचना देते हुए बताया कि यहां पर बहुत ज्यादती हो रही है, बच्चों को कई दिनों से नमक-रोटी और नमक-चावल दिया जा रहा है.

इस सूचना पर मैं करीब 12 बजे घर से निकला. विद्यालय पहुंचने से पहले मैंने खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) बृजेश सिंह को फोन कर सूचना दी कि मैं हिनौता ग्राम सभा स्थित सिऊर प्राथमिक विद्यालय जा रहा हूं. इस पर एबीएसए ने ठीक है कहकर फोन काट दिया.

स्कूल पहुंचने के बाद सब लोग मुझे एकटक देखने लगे तो मैंने उनसे कहा कि आप लोग अपना काम करिए और हमें अपना काम करने दीजिए. हालांकि उस समय वे समझ नहीं पाए थे कि मैं पत्रकार हूं या शिक्षक या कोई और.

इसके बाद मैंने पूरा वाकया अपने कैमरे में रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया. मैंने वहां देखा कि एक बाल्टी में रोटी रखी हुई है. बच्चे थाली लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. बच्चों को पहले रोटी दिया गया और फिर नमक दिया गया.

यह सब देखकर मेरा सीना छलनी हो गया लेकिन फिर भी मैंने वीडियो पूरा किया. खाने के बाद मैंने 10-15 बच्चों से बात की. मैंने स्कूल के शिक्षामित्र और वहां मौजूद ग्रामीणों से भी बात की. वहां से आने के बाद मैंने अपने अखबार के लिए रिपोर्ट फाइल कर दी.

रिपोर्ट फाइल किए जाने के बाद प्रशासन की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आई और उन्होंने क्या कार्रवाई की?

अपने अखबार के लिए रिपोर्ट करने के बाद मैंने इसकी सूचना जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथियों को दी. इस पर कुछ पत्रकार साथी जिलाधिकारी के पास गए और उनसे इस मामले पर सवाल पूछा. इस पर जिलाधिकारी ने जांच कराकर बताने की बात कही. उन्होंने तहसीलदार और एसडीएम चुनार को निर्देशित किया कि आप इसकी जांच करके बताइए कि पूरा मामला क्या है.

जांच के बाद तहसीलदार और एसडीएम चुनार ने जिलाधिकारी को बताया कि मामला सही है. स्कूल में मिड-डे मील में नमक-रोटी ही दिया गया. वहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद 5-6 बजे जिलाधिकारी ने बयान दिया कि यह मामला सही है.

उन्होंने दो अध्यापकों, एनसीआरपी अधिकारी (नया पंचायत रिसोर्स सेंटर) और मिड-डे मील प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित करने की भी बात कही. इन दो अध्यापकों को निलंबित किए जाने के बाद लगातार पांच-छह जांच हुई, जिसमें शिक्षा विभाग के पांच-छह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

इसके बाद 23 अगस्त को जिलाधिकारी स्वयं विद्यालय की जांच करने गए. वहां उन्होंने बंद कमरे में बच्चों, शिक्षामित्रों और मेस के कर्मचारियों से पूछताछ की. विद्यालय के कमरे से बाहर निकलने के बाद हम लोगों ने उनका बयान लिया जिसमें उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि नमक रोटी दिया गया था. इस दौरान जिलाधिकारी ने खुद स्वीकार किया कि इस घटना से एक दिन पहले बच्चों को नमक-चावल दिया गया था.

बच्चों को नमक-रोटी देने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद प्रशासन ने अचानक आपके खिलाफ कार्रवाई करने का मन क्यों बना लिया?

जिलाधिकारी की जांच करने के चार-पांच दिन बाद 27 अगस्त को एक और जांच होती है. इस बार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) मैडम आती हैं. वह बाकी लोगों का बयान लेती हैं. सब लोग वीडियो में बयान सही देते हैं लेकिन वो रिपोर्ट में पूरा बयान बदल देती हैं.

Mirzapur School Mid Day Meal

पूरे मामले की दोबारा जांच करने के बाद वह रिपोर्ट सौंप देती हैं. इस तरह खबर छपने के करीब 10 दिन बाद 31 अगस्त की रात को जिलाधिकारी के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय द्वारा मेरे, मेरे सोर्स और एक वरिष्ठ सहयोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है कि हमने छलपूर्वक वीडियो तैयार करवाया है.

मेरे खिलाफ 420, 120बी, 193, 186 का मुकदमा दर्ज कराया गया. इससे मैं और मेरे परिवारवाले काफी परेशान हैं. सात-आठ दिन से चिंता के कारण मैं कुछ खा-पी नहीं पा रहा हूं. मुझे स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया और पत्रकारों का काफी समर्थन मिल रहा है.

जिले के कई पत्रकारों ने मुझे बताया कि स्कूल में बंद कमरे के पीछे जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने कहा कि इस पत्रकार ने मेरी छवि खराब की है, मैं इसे बर्बाद करके छोड़ूंगा.

हमारे कुछ पत्रकार मित्र बता रहे हैं कि जिन लोगों ने इस मामले में बयान दिया है, उन्हें 50 हजार से लेकर एक-डेढ़ लाख रुपये देने के लालच दिए जा रहे हैं.

जिलाधिकारी ने कहा है कि प्रिंट मीडिया का पत्रकार होकर आपने वीडियो क्यों बनाया? इस पर कहना चाहते हैं?

मेरा अखबार जनसंदेश टाइम्स लखनऊ से प्रकाशित होता है. इसकी वेबसाइट और यूट्यूब चैनल भी है. वहां हमारे वीडियो भी जाते हैं. उनको कोई जानकारी ही नहीं है. पढ़ा-लिखा होने के बावजूद अगर कोई ऐसा बयान दे रहा है तो वह अनजाने में नहीं बल्कि किसी साजिश के तहत ही दे रहा होगा.

मैं एक सोर्स हूं और ब्यूरो को खबरें लाकर देता हूं. ब्यूरो हर जगह जा नहीं सकता है, इसलिए वे हमसे खबरें मंगाते हैं. उसमें यह शर्त होती है कि खबर पुष्ट होनी चाहिए और वीडियो के साथ होनी चाहिए. इतना हक तो एक आम आदमी को भी होता है कि वह वीडियो बनाकर कार्रवाई के लिए किसी को भी दे सकता है.

यह आपराधिक तो नहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. यहां खनन संपदा की भी भरमार है. यही कारण है कि यहां पर अवैध कार्य और अन्य घटनाएं होती रहती हैं. हत्या वगैरह तो नहीं लेकिन कई अन्य तरह के अपराध होते रहते हैं. इन सब की स्टोरी करके मैं बाकी मीडिया संस्थानों को देता हूं. इस तरह से हम समाज को सुधारने का भी काम करते हैं ताकि ऐसे काम न हों.

मेरी तीन-चार खबरें रोज अखबार में छपती हैं. दुर्घटना वगैरह की खबरों को रिपोर्ट करता हूं और पुलिस मुठभेड़, माफियागिरी, अवैध काम, हत्या आदि बड़ी खबरों का वीडियो कवरेज भी करता हूं.

आप पत्रकारिता के क्षेत्र में कैसे आए?

मैं मिर्ज़ापुर के अहरौरा कस्बे का रहने वाला हूं. मैंने यहां के वनस्थली महाविद्यालय से पढ़ाई की हुई है और मैं बीकॉम फेल हूं. मेरी पहचान के कई लोग पत्रकार थे और उनके साथ जाकर मैं वीडियो बनाता था, कवरेज करता था और इस तरह से धीरे-धीरे मैं इस लाइन में आ गया.

शुरुआती दौर में चार साल तक मैं भाजपा के स्थानीय युवा मोर्चा का महामंत्री रहा हूं, लेकिन पत्रकारिता में आने के बाद मैंने यह सब छोड़ दिया है.

पंजाब नेशनल बैंक से दो लाख रुपये का लोन लेकर मैंने एक मोबाइल की दुकान भी खोली हुई है. अपने और अपने परिवार के जीने-खाने के लिए कमा लेता हूं. मैं पिछले ढाई साल से जनसंदेश टाइम्स के साथ जुड़ा हुआ हूं. इससे पहले पांच-छह साल तक मैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा रहा. मैं दिल्ली के बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के सोर्स या सहायक के रूप में काम करता था.

मैंने आज तक, एएनआई, न्यूज 24 और एनडीटीवी जैसे संस्थानों के लिए अनाधिकारिक तौर पर काम किया है. ये लोग बोलते थे कि एक वीडियो बनाकर दे दो और हम तुम्हें पेट्रोल का पैसा दे देंगे. मैं उनके लिए स्ट्रिंगर न होकर केवल सहायक या सोर्स था.

मिर्ज़ापुर ज़िले का वह प्राथमिक स्कूल, जहां मिड-डे मील में बच्चों को नमक-रोटी खिलाने का सामने आया. (फोटो साभार: पवन जायसवाल)

मिर्ज़ापुर ज़िले का वह प्राथमिक स्कूल, जहां मिड-डे मील में बच्चों को नमक-रोटी खिलाने का सामने आया. (फोटो साभार: पवन जायसवाल)

मेरे परिवार में छह बहनें हैं और पांच भाई हैं. पिताजी की स्टेशनरी की दुकान है. उन्हीं के ठीक बगल में मेरी मोबाइल की दुकान है. मेरा छोटा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके बेरोजगार बैठा हुआ है. मेरे बड़े भाई ने कम्पाउडर की पढ़ाई की है लेकिन वो भी बेरोजगार है.

एक और छोटा भाई बीए कर चुका है. पांच बहनों की शादी हो गई है और सबसे छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रही है. हर दो-तीन साल पर एक भाई-बहन की शादी होती है.

इस पूरे मामले में आपके प्रति आपके संस्थान का रवैया कैसा रहा?

हमारे संपादक, ब्यूरो चीफ, सभी पत्रकार साथी और जिले के सभी अखबारों और इलेक्ट्राॉनिक मीडिया के पत्रकार साथी हमारे साथ हैं. हमारे संपादक ने हमसे कहा है कि बेटा डरने की जरूरत नहीं है. इसी तरह से लगे रहो, काम करते रहो. बहुत अच्छा काम कर रहे हो. जिन संस्थानों के लिए मैंने पहले काम किया हुआ है, उन्होंने भी मेरी मदद की.

जिला प्रशासन ने आपके खिलाफ कार्रवाई की है लेकिन इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका को कैसे देखते हैं?

सरकार से कोई दिक्कत नहीं है. जिला प्रशासन खुद बचने के लिए सरकार को बदनाम कर रहा है. माननीय जिलाधिकारी महोदय गलत बयानबाजी कर रहे हैं. पूरी गलती सीडीओ मैडम की है जबकि जिलाधिकारी सीडीओ मैडम की गलती पर पर्दा डाल रहे हैं और खुद गलत बन गए हैं.

अगर हमारे साथ न्याय नहीं होगा तो सरकार की ही गलती होगी और अगर हमारे साथ न्याय होगा तो हमें सरकार के ऊपर पूरा भरोसा है. इसका कारण है कि मैंने सरकार को रास्ता दिखाया कि देखिए आप मिड-डे मील के नाम पर पैसा भेजते हैं और नीचे वाले लोग पैसा खा जा रहे हैं.

सरकार की मंशा के विपरीत काम करने वालों के खिलाफ काम करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ खबर करके क्या मैंने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया है. ईर्ष्या के कारण मेरे खिलाफ कार्रवाई हो रही है.

मेरा मानना है कि जब हमारी सरकारी अच्छा काम कर रही है, मोदी जी और योगी जी इतना अच्छा काम कर रहे हैं तो ये भ्रष्ट अधिकारी इतनी गंदगी क्यों करते हैं. इन्हीं सब चीजों को लेकर मैं खुलासा करता हूं.

पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कई पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, मुकदमे दर्ज हुए हैं और उनकी गिरफ्तारी हुई है. क्या आपको लगता है कि उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को चुप कराने के लिए ये कार्रवाइयां की जा रही हैं?

हमें सरकार की अच्छाइयां नहीं दिखती हैं, बुराइयां दिखती हैं और हम बुराइयों को रिपोर्ट करते हैं. इससे सरकार को पता चलता है कि यहां पर भ्रष्ट अधिकारी हैं. लेकिन कुछ अधिकारी सरकार को खुश करने के लिए यह मान लेते हैं कि हम उनके विरोधी हैं और हमारे खिलाफ कार्रवाई करते हैं.

सरकार तो जांच करवाकर ही क्लीनचिट देती है लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, क्योंकि वे जिले के राजा होते हैं. जिले के राजा कुछ भी कर सकते हैं, हमारा आपका फोन टैप करा सकते हैं, एक मिनट हमें फ्रॉड साबित कर सकते हैं.

आप अब आगे क्या देखते हैं?

मैं पिछले तीन-चार दिन से लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहा हूं. थाने के भी संपर्क में हूं. हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल मेरे खिलाफ कुछ नहीं मिला है. मैं अभी अपना काम कर रहा हूं. एक बात साफ है कि मुझे जिला प्रशासन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है कभी भी कुछ भी हो सकता है.

जिलाधिकारी, एसडीएम, लेखपाल और कई अन्य अधिकारियों ने दौरा किया और उनकी रिपोर्ट में मेरे खिलाफ कुछ नहीं था तो सीडीओ मैडम अपनी रिपोर्ट में ऐसा क्या कर देती हैं कि जिसमें मुझे अपराधी बना दिया जाता है.

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