तबादले के विरोध में मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश ताहिलरमानी ने दिया इस्तीफ़ा - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Saturday, 7 September 2019

तबादले के विरोध में मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश ताहिलरमानी ने दिया इस्तीफ़ा

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस विजया के. ताहिलरमानी का मेघालय हाईकोर्ट में तबादला करने की सिफारिश की थी. इस फैसले का विरोध करते हुए ताहिलरमानी ने कोलेजियम से पुनर्विचार का अनुरोध किया था.

मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस विजया के. ताहिलरमानी. (फोटो: फेसबुक)

मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस विजया के. ताहिलरमानी. (फोटो: फेसबुक)

नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश विजया के. ताहिलरमानी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के मेघालय हाईकोर्ट स्थानांतरित करने के आदेश पर पुनर्विचार करने का उनका अनुरोध ठुकराए जाने के बाद इस्तीफा दे दिया.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ताहिलरमानी ने शुक्रवार रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपना इस्तीफा दिया और भारत के प्रधान न्यायधीश रंजन गोगोई को इसकी एक प्रति भी भेजी.

जस्टिस गोगोई के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने ताहिलरमानी को मेघालय हाईकोर्ट स्थानांतरित किए जाने की सिफारिश की थी. उन्हें पिछले साल आठ अगस्त को ही मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.

कॉलेजियम ने 28 अगस्त को उनका तबादला करने की सिफारिश की थी. इसके बाद जस्टिस ताहिलरमानी ने उनके तबादले के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने के लिये कॉलेजियम को एक प्रतिवेदन दिया था. उन्होंने कॉलेजियम के फैसले का विरोध भी किया था.

शीर्ष अदालत के कॉलेजियम में जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन शामिल थे. कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल का तबादला मद्रास हाईकोर्ट करने की सिफारिश भी की थी.

ताहिलरमानी के अनुरोध के बाद भी कोलेजियम 3 सितंबर को अपने फैसले पर टिका रहा.

अपने प्रस्ताव में कोलेजियम ने कहा, कॉलेजियम ने प्रतिनिधित्व के मामले को बहुत ध्यान से देखा और सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखा. पुनर्विचार करने पर, कोलेजियम का विचार है कि उनके अनुरोध को स्वीकार करना संभव नहीं है. इसलिए, कॉलेजियम 28 अगस्त, 2019 को मेघालय हाईकोर्ट में जस्टिस वीके ताहिलरामनी के स्थानांतरण की अपनी सिफारिश को दोहराता है.

जस्टिस ताहिलरमानी को 26 जून 2001 को बंबई हाईकोर्ट का जस्टिस नियुक्त किया गया था.

बंबई हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर काम करते हुये जस्टिस ताहिलरमानी ने मई, 2017 में बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में सभी 11 व्यक्तियों की दोषसिद्धि और उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा था. शीर्ष अदालत ने इस मामले को गुजरात की अदालत से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया था.

इसके साथ ही उन्होंने महिला कैदियों को गर्भपात कराने का अधिकार देने जैसा महत्वपूर्ण फैसला दिया था. 2001 में बॉम्बे हाईकोर्ट की जज नियुक्त होने से पहले ताहिलरमानी महाराष्ट्र सरकार के लिए सरकारी वकील थीं.

जस्टिस ताहिलरमानी दो अक्टूबर 2020 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं.

ताहिलरमानी का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल एकमात्र ऐसी महिला जज बचेंगी जो किसी हाईकोर्ट का नेतृत्व कर रही हैं.

हाईकोर्ट के जजों ने इससे पहले भी आरोपों या अन्य कारणों से इस्तीफा दिया है लेकिन कोलेजियम से मतभेद के कारण जजों के इस्तीफे के बहुत कम मामले सामने आते हैं.

साल 2017 में कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस जयंत पटेल ने तब इस्तीफा दे दिया था जब कोलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया था. उस समय कर्नाटक हाईकोर्ट में दूसरे वरिष्ठ जज रहे पटेल ने कोई कारण बताए बिना इस्तीफा दे दिया था. गुजरात हाईकोर्ट के जज रहते हुए उन्होंने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था.

जस्टिस ताहिलरमानी के स्थानांतरण को सामान्य नहीं माना जा सकता: बृंदा करात

माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायधीश विजया ताहिलरमानी के स्थानांतरण और उसके बाद इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए शनिवार को कहा कि यह ‘अपमानजनक’ है और इसे सामान्य नहीं माना जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने ताहिलरमानी का स्थानांतरण मद्रास हाईकोर्ट से मेघालय हाईकोर्ट में कर दिया था जिसके बाद शुक्रवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. ताहिलरमानी ने इससे पहले कोलेजियम से स्थानांतरण के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था जिसे दो दिन पहले अस्वीकार कर दिया गया.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता बृंदा ने कहा, ‘मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश विजया ताहिलरमानी का मेघालय उच्च न्यायाल में स्थानांतरण और उसके बाद उनके कथित इस्तीफे की खबर परेशान और स्तब्ध करने वाली है.’

उन्होंने कहा, ‘इस स्तर पर बहुत कम महिला न्यायाधीश हैं और उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया वह न केवल उनके लिए बल्कि कुल मिलाकर महिलाओं के लिए निंदाजनक और अपमानजनक है.’ माकपा नेता ने कहा कि ताहिलरमानी का साफ-सुथरा रिकॉर्ड रहा है और वह हाईकोर्ट के अधिकतर न्यायाधीशों में वरिष्ठ हैं.

बृंदा ने कहा, ‘75 न्यायाधीशों वाली अदालत से केवल दो न्यायाधीशों वाले मेघालय में स्थानांतरण करना सामान्य नहीं माना सकता है और यह एक तरह से पद को छोटा किया जाना है. इस घटना से एक बार फिर असंतोषजनक और गैर पारदर्शी न्यायिक नियुक्ति और स्थानातंरण व्यवस्था रेखांकित हुई है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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