उमर और फ़ारूक़ छला हुआ महसूस कर रहे हैं, वे चुप नहीं बैठेंगे: सफ़िया अब्दुल्ला - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Tuesday, 1 October 2019

उमर और फ़ारूक़ छला हुआ महसूस कर रहे हैं, वे चुप नहीं बैठेंगे: सफ़िया अब्दुल्ला

द वायर के साथ एक विशेष साक्षात्कार में सफ़िया अब्दुल्ला ख़ान ने बताया कि उनके पिता फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर पीएसए लगाए जाने से पूरा परिवार हैरान है.

उमर अब्दुल्ला, सफिया अब्दुल्ला और फ़ारूक़ अब्दुल्ला (फोटो: फाइल/ट्विटर)

उमर अब्दुल्ला, सफिया अब्दुल्ला और फ़ारूक़ अब्दुल्ला (फोटो: फाइल/ट्विटर)

श्रीनगर : ‘मेरे भाई उमर और पिता फ़ारूक़ अब्दुल्ला के साथ भारत सरकार ने जिस तरह का बर्ताव किया है और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा जिस तरह से समाप्त कर दिया गया है, उसके बाद वे छला हुआ महसूस कर रहे हैं.’. यह कहना है कि सफिया अब्दुल्ला का.

सफिया अब्दुल्ला परिवार की वो पहली सदस्य हैं, जिन्होंने 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करने और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दोनों नेताओं की हिरासत के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है.

द वायर  को दिए गए एक खास इंटरव्यू में सफिया अब्दुल्ला खान ने 15 सितंबर को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत अपने पिता फ़ारूक़ अब्दुल्ला की गिरफ्तारी पर भी हताशा प्रकट की और बताया कि उस रात 11:30 बजे उन्हें इस क्रूर कानून के तहत उनकी गिरफ्तारी के आदेश के बारे में बताया गया.

सफिया ने बताया, ‘वे सोए हुए थे, जब मजिस्ट्रेट और उनके साथ आए अन्य अधिकारियों ने उन्हें जगाया. उन्होंने पहले उनकी सेहत के बारे में पूछा और उसके बाद उन्हें एक सरकारी पत्र सौंपा जिसमें उनकी गिरफ्तारी के आधारों का स्पष्टीकरण दिया गया था.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में श्रीनगर के सांसद फ़ारूक़ अब्दुल्ला पीएसए के तहत गिरफ्तार किए गए सबसे प्रभावशाली नाम हैं. यह कानून अधिकारियों को ‘पहली बार अपराध करने वालों’ को बिना ट्रायल के तीन महीने तक हिरासत में लेने का अधिकार देता है.

फ़ारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो: पीटीआई)

फ़ारूख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो: पीटीआई)

सोमवार 16 सितंबर को तीन बार मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला के गुप्कर रोड स्थित आवास को जेल घोषित कर दिया गया. 1978 में फ़ारूक़ अब्दुल्ला के पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख़ अब्दुल्ला ने टिम्बर तस्करी से निपटने के लिए पीएसए लागू किया था.

हालांकि, बीते सालों में इस कानून का इस्तेमाल अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं, पत्थरबाजों और आतंकवादियों के खिलाफ किया गया है. यह पहली बार है जब पीएसए का इस्तेमाल राज्य के एक बड़े कद के ‘मुख्यधारा के’ यानी भारत समर्थक नेता के खिलाफ किया गया है.

पांच अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर की स्वायत्त हैसियत के साथ ही भारतीय संघ के तहत राज्य के तौर पर इसके दर्जे के समाप्ति की घोषणा के तत्काल बाद फ़ारूक़ अब्दुल्ला को नजरबंद कर लिया गया था. हालांकि, संसद में शाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को हिरासत में नहीं लिए जाने का दावा किया था.

सफिया अपने पिता के घर के बगलवाले घर में रहती हैं, लेकिन उन्हें अगले दिन सुबह अपने पिता पर पीएसए लगाए जाने की जानकारी मिली, जब वे अपने दो बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए बाहर निकलीं.

उन्होंने बताया, ‘मैं अपने अपने बच्चों को आर्मी स्कूल पहुंचाने के लिए घर से निकलने वाली थी, जब मैंने कुछ कर्मचारियों को बाहर देखा, लेकिन तब तक मुझे पूरा माजरा समझ में नहीं आया था. जब मैं वापस आयी और पूछा कि क्या हुआ है, तब मुझे बताया गया कि मेरे पिता पर पीएसए लगा दिया गया है.’

सफिया ने बताया कि उन्होंने तत्काल ही घर में दाखिल होने की कोशिश की ‘लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई.’

नम आंखों से सफिया ने कहा, ‘यह मेरे बेहद घबराहट भरा क्षण था. मैंने अधिकारियों से दरख्वास्त की कि कम से कम इंटरकॉम से मेरे पिता से बात करवा दें. उनकी आवाज सुनते ही मैं रोने लगी.’

सफिया ने बताया कि इसके बाद वे अपने भाई और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मिलने हरि निवास में बनाई गई जेल में गईं. ‘उमर को अधिकारियों से (पीएसए लगाए जाने के बारे में) पता लगा था. यह उसके लिए भी हैरान करने ने वाली खबर थी.’

फ़ारूक़ अब्दुल्ला की खराब सेहत के मद्देनजर सफिया को मेडिकल देखभाल के लिए उनके पिता से मिलने की इजाजत दी गई, मगर यह इंतजाम करने के लिए उन्हें शहर भर के चक्कर लगाने पड़े. सफिया ने कहा कि उन्हें अपने पिता से मिलने के लिए श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी से इजाजत लेनी पड़ी.

सफिया ने बताया, ‘मैंने डीसी ऑफिस से संपर्क किया, लेकिन मुझे बताया गया कि वे सचिवालय में हैं. आखिरी बार मैं अपने दादा (शेख अब्दुल्ला) के साथ सचिवालय गयी थी. इस बार जब मैं वहां गयी, तब मुझे इस बात की थोड़ी भी जानकारी नहीं थी कि मुझे किससे मिलना है.’

उन्होंने कहा, अपने बचपन के घर को जेल में बदलते हुए देखना काफी डरावना था. मैंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि मुझे अपने ही घर में दाखिल होने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत होगी. लेकिन इन तकलीफों ने मुझे मजबूत बनाया है. आज मुझे यह एहसास होता है कि मैं शेख अब्दुल्ला की पोती हूं.’

जवाहरलाल नेहरू के साथ शेख अब्दुल्ला. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

जवाहरलाल नेहरू के साथ शेख अब्दुल्ला. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

पीएसए के तहत फ़ारूक़ अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देने के सवाल पर सफिया ने कहा कि आने वाले दिनों में परिवार इस पर फैसला करेगा. ‘हम लोग (परिवार) कई वकीलों के संपर्क में हैं. फिलहाल हमारे सामने उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.’

जिस आधार पर उनके पिता पर पीएसए लगाया गया है, उसे ‘हास्यास्पद’ बताते हुए सफिया ने कहा कि उन्हें (फ़ारूक़ अब्दुल्ला) जो कागज दिए गए, उसमें 2017 के बाद के उनके राजनीतिक भाषणों की अखबारी कतरनें शामिल थीं.

सफिया ने कहा कि जिस तरह से केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया है, उसके बाद उनके भाई और पिता को लग रहा है कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है.

उन्होंने बताया, ‘आम लोगों की गालियां खाने के बावजूद उमर और फ़ारूक़ साहब हमेशा भारत सरकार के साथ खड़े रहे. अपने पूरे जीवन में वे ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ के पक्ष में खड़े रहे. वे हमेशा भारत के संविधान के दायरे में कश्मीर समस्या के समाधान के पक्ष में खड़े रहे…. आज उनके साथ जैसा सुलूक किया गया है, उसके बाद उन्हें लग रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है. यह कश्मीरियों की पहचान से जुड़ा हुआ मसला है.’

अब्दुल्ला पिता-पुत्र के अलावा, मुख्यधारा के जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया है, उनमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता मोहम्मद सागर, मुबारक गुल, नासिर असलम वानी और सैयद अखून, जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आए शाह फैसल शामिल हैं.

कुल मिलाकर सभी स्तरों पर हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या 4,000 से ज्यादा होने का अनुमान है. सरकार ने गिरफ्तारियों के आंकड़े को साझा करने से इनकार कर दिया है. केंद्र के कदम के खिलाफ प्रतिरोध के तौर पर सफिया ने अपने घर के मुख्य दरवाजे के सामने काला झंडा लगा दिया है.

जुनैद काटजू श्रीनगर में कार्यरत पत्रकार हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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