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Tuesday, 1 October 2019

सीजेआई रंजन गोगोई ने जस्टिस ताहिलरमानी के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीआई को अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस विजया के. ताहिलरमानी का तबादला मेघालय हाईकोर्ट में होने पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद 6 सितंबर को उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.

चीफ जस्टिस विजया के ताहिलरमानी. (फोटो: पीटीआई)

चीफ जस्टिस विजया के ताहिलरमानी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सीबीआई को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई से जस्टिस विजया के. ताहिलरमानी के खिलाफ कथित प्रतिकूल खुफिया रिपोर्ट पर ‘कानून के अनुसार’ कार्रवाई किये जाने की अनुमति मिल गई है.

जस्टिस ताहिलरमानी ने हाल में मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे दिया था. जस्टिस ताहिलरमानी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के मेघालय हाईकोर्ट स्थानांतरित करने के आदेश पर पुनर्विचार करने का उनका अनुरोध ठुकराने के बाद इस्तीफा दे दिया था.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इसके बाद खुफिया ब्यूरो ने हाल में पांच पृष्ठ की रिपोर्ट सौंपी थी.

इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए सूत्रों ने संपत्ति के लेन-देन में कथित अनियमितताओं और मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में प्रशासनिक पक्ष पर कुछ फैसले लेने की रिपोर्ट का उल्लेख किया. कॉलेजियम ने 28 अगस्त को उनका तबादला करने की सिफारिश की थी.

इसके बाद जस्टिस ताहिलरमानी ने उनके तबादले के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने के लिये कॉलेजियम को एक प्रतिवेदन दिया था. उन्होंने कॉलेजियम के फैसले का विरोध भी किया था.

शीर्ष अदालत के कॉलेजियम में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी. रमण, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन शामिल थे.

चेन्नई और उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के कुछ स्थानों पर वकीलों ने कॉलेजियम के फैसले के खिलाफ विरोध जताया था. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के उनके तबादले की सिफारिश पर फिर से विचार करने के आग्रह को ठुकराने के कुछ दिन बाद न्यायामूर्ति ताहिलरमानी ने छह सितंबर को इस्तीफा दे दिया था.

उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजा था और इसकी एक प्रति सीजेआई गोगोई को भी भेजी थी.

इसके बाद 12 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों के तबादले की प्रत्येक अनुशंसा ठोस वजहों पर आधारित होती है.

जस्टिस ताहिलरमाणी का नाम लिए बगैर ही उच्चतम न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल संजीव एस कलगांवकर के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि न्यायाधीशों के तबादले के कारणों का खुलासा संस्थान हित में नहीं किया जाता लेकिन शीर्ष अदालत का कॉलेजियम, ऐसी परिस्थितियों में जहां यह जरूरी हो जाएगा, इसका खुलासा करने से नहीं हिचकिचाएगा.

गत 21 सितंबर को जारी एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने जस्टिस ताहिलरमानी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था. इसमें कहा गया था कि उनका इस्तीफा छह सितंबर से तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.

इसके बाद एक अन्य अधिसूचना में बताया गया था कि जस्टिस वी. कोठारी को मद्रास उच्च न्यायालय का कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया है.

बता दें कि, जस्टिस गोगोई के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने ताहिलरमानी को मेघालय हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की थी, जो कि मद्रास हाईकोर्ट के मुकाबले काफी छोटा हाईकोर्ट है. उन्हें पिछले साल आठ अगस्त को ही मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.

कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल का तबादला मद्रास हाईकोर्ट करने की सिफारिश भी की थी.

जस्टिस ताहिलरमानी हाईकोर्ट से तीन अक्टूबर, 2020 को रिटायर होने वाली थीं. उन्हें 26 जून 2001 को बॉम्बे हाईकोर्ट का जस्टिस नियुक्त किया गया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर काम करते हुए जस्टिस ताहिलरमानी ने मई, 2017 में बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में सभी 11 व्यक्तियों की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था. शीर्ष अदालत ने इस मामले को गुजरात की अदालत से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया था.

इसके साथ ही उन्होंने महिला कैदियों को गर्भपात कराने का अधिकार देने जैसा महत्वपूर्ण फैसला दिया था. 2001 में बॉम्बे हाईकोर्ट की जज नियुक्त होने से पहले ताहिलरमानी महाराष्ट्र सरकार के लिए सरकारी वकील थीं.

ताहिलरमानी का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल एकमात्र ऐसी महिला जज हैं जो किसी हाईकोर्ट का नेतृत्व कर रही हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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