पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा कांग्रेस भी करेगी जम्मू कश्मीर बीडीसी चुनाव का बहिष्कार - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Thursday, 10 October 2019

पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा कांग्रेस भी करेगी जम्मू कश्मीर बीडीसी चुनाव का बहिष्कार

कांग्रेस के अलावा पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, सीपीएम और कश्मीर के कुछ दूसरे राजनीतिक दलों ने भी बीडीसी चुनाव प्रक्रिया में शामिल न होने की बात कही है. भाजपा ने कहा कि बीडीसी चुनाव का विरोध कांग्रेस, एनसी, पीडीपी के खोखलेपन को प्रदर्शित करता है.

Shopian: Security personnel stand guard outside a polling station during the fifth phase of Lok Sabha elections, in Shopian district, Monday, May 6, 2019. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI5_6_2019_000219B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

जम्मू: जम्मू कश्मीर में 24 अक्टूबर को होने वाले ब्लॉक विकास परिषद (बीडीसी) चुनाव में शामिल होने के पूर्व में लिए फैसले को पलटते हुए कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह बीडीसी चुनावों का बहिष्कार करेगी.

विपक्षी पार्टी ने चुनाव के बहिष्कार के लिए राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्क्रिय करने के केंद्र के फैसले के बाद राज्य प्रशासन के उदासीन रवैये और लंबे समय तक अपने वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में रखने को वजह बताया.

संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को मिले विशेष दर्जे को बीते पांच अगस्त को वापस लिए जाने के बाद यहां यह पहला चुनाव होगा.

चुनाव के समय और मौजूदा सुरक्षा हालात को लेकर चिंता जताने के बावजूद कांग्रेस ने नेशनल पैंथर्स पार्टी के साथ पिछले सप्ताह बीडीसी चुनावों में हिस्सा लेने का फैसला किया था.

बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने जम्मू संवाददाताओं से कहा, ‘कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में विश्वास करती है और कभी भी किसी चुनाव से दूर नहीं भागती है. हालांकि आज हम राज्य प्रशासन के उदासीन रवैये और घाटी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगातार हिरासत में रखे जाने के कारण बीडीसी चुनावों का बहिष्कार करने को मजबूर हैं.’

मीर खुद भी जम्मू में नजरबंद थे और उन्हें हाल में ही रिहा किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने जान-बूझकर मुख्यधारा की पार्टियों की राह में अड़ंगा लगाया ताकि भाजपा बीडीसी चुनाव जीत सके.

मीर ने कहा, ‘उन्होंने हमारे नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा है और राजनीतिक गतिविधियां होने नहीं दी और इस कवायद में कांग्रेस को जान-बूझकर निशाना बनाया गया.’

मीर ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव में भाग लेने का फैसला करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग से संपर्क करके उसके नेताओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था.

उन्होंने कहा, ‘हमने बीडीसी चुनाव में हिस्सा लेने के लिए उम्मीदवारों को पत्र जारी किए थे ताकि हम लोकतांत्रिक कवायद में योगदान कर सकें और हमारे कुछ उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र भी दाखिल किए.’

मीर ने कहा, ‘हालांकि बुधवार को उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल करने का आखिरी दिन है, तो हमने चुनाव से दूर रहने का फैसला किया है. इसे राज्य में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थगित किया जाना चाहिए था, क्योंकि सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने ऐसी ही मांग की थी.’

राज्य प्रशासन पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को सुरक्षा देने से इनकार किया गया और उन्हें घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई जबकि पुलिस महानिदेशक ने राज्य में 300 के करीब सक्रिय आतंकवादियों के होने की बात कही है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हम जिम्मेदार राष्ट्रीय पार्टी हैं. इसके बावजूद हमारा लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है. हम चुनाव में हिस्सा लेने को तैयार हैं, क्योंकि हमारे नेता राजीव गांधी का सपना पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना था लेकिन सरकार ने हमें चुनाव का बहिष्कार करने पर मजबूर किया है.’

उन्होंने कहा कि प्रशासन 73वें संविधान संशोधन के बजाय राज्य संविधान के तहत चुनाव करा रहा है.

मीर ने कहा कि तीन स्तरीय प्रणाली राज्य पंचायती कानून में संशोधन के जरिये लाई गई थी जबकि भाजपा ने अपने शासन में इस कानून को खत्म कर दिया जिसके तहत सभी का चुनाव निर्वाचन मंडल के जरिये होता है.

उन्होंने कहा, ‘बिना मुख्यधारा की पार्टियों से विचार विमर्श किए बीडीसी चुनाव कराकर राज्यपाल शासन अपना या सत्तारूढ़ पार्टी के लक्ष्य को पूरा कर रहा है. वे उन बीडीसी में चुनाव करा रहे हैं, जहां पंचों की संख्या एक या तीन है.’

मीर ने कहा कि पिछले साल 12,500 पंचायतों में चुनाव नहीं कराए गए, इसके बावजूद बीडीसी चुनाव कराए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने बीडीसी चुनाव की तारीख घोषित करने के दिन ही इसे स्थगित करने की अपील की क्योंकि स्थिति और राजनीतिक माहौल अनुकूल नहीं है और कई नेता हिरासत में है.

सरकार के दो महीने पहले अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने के समय से पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत मुख्य राजनीतिक दलों के नेताओं को या तो हिरासत में ले लिया गया या नजरबंद रखा गया है.

राज्य प्रशासन ने पिछले सप्ताह कहा था कि उचित विश्लेषण के बाद कश्मीर में राजनीतिक दलों के नेताओं को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जाएगा.

डेली एक्सलसियर की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के अलावा पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, सीपीएम और कश्मीर के कुछ दूसरे राजनीतिक दलों ने भी बीडीसी चुनाव प्रक्रिया में शामिल न होने की बात कही है.

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 310 ब्लॉकों के चुनाव के लिए अब तक 1382 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. बीडीसी चुनावों के लिए बुधवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था.

डेली एक्सलसियर से बातचीत में मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि बीडीसी चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. उन्होंने कहा कि 22 जिलों के 1382 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है.

जम्मू कश्मीर के 310 ब्लॉकों (प्रखंड) में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बीते आठ अक्टूबर को अधिसूचना जारी की गई थी. बीडीसी चुनाव 24 अक्टूबर को होने वाले हैं.

बीते बुधवार को ही जेएनयू की पूर्व छात्रनेता और जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) पार्टी की नेता शेहला राशिद ने चुनावी राजनीति छोड़ने का ऐलान किया है.

शेहला ने अपने बयान में कहा था, ‘पिछले दो से अधिक महीनों से लाखों नागरिकों को प्रतिबंधों के बीच रहना पड़ रहा है. भारत सरकार अभी भी कश्मीर में बच्चों का अपहरण कर रही है और लोग एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को फोन करने से भी वंचित हैं. वहीं, केंद्र सरकार जल्द ही कश्मीर में ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) चुनाव कराने जा रही है, जो बाहरी दुनिया को यह दिखाने का प्रयास है कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य है.’

बीडीसी चुनाव का विरोध कांग्रेस, एनसी, पीडीपी के खोखलेपन को प्रदर्शित करता है: भाजपा

भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई ने पहली बार राज्य में आयोजित हो रहे बीडीसी चुनाव में हिस्सा नहीं लेने के लिए कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉफ्रेंस की निंदा की. राज्य में कांग्रेस ने चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है. नेशनल कॉफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही हैं.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अनिल गुप्ता ने कहा कि तीनों पार्टियों का खोखलापन सामने आ गया है और ये पार्टियां राज्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों को पचा पाने में असमर्थ हैं.

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं हमारे लोकतंत्र प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है और यह सत्ता के पूरक हैं न कि समानांतर केंद्र हैं.

गुप्ता ने कहा, ‘एनसी और पीडीपी को इस सच्चाई को उतना ही स्वीकार करने की जरूरत है जितना 370 और अनुच्छेद 34ए के खत्म होने की वास्तविकता को. उन्हें मुख्यधारा की राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए खुद को बदलने की जरूरत है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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