सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में किए बदलाव का फ़ैसला वापस लिया, होगी तुरंत गिरफ़्तारी - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Tuesday, 1 October 2019

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में किए बदलाव का फ़ैसला वापस लिया, होगी तुरंत गिरफ़्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका स्वीकार करते हुए यह फ़ैसला दिया है. मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसमें बदलाव करते हुए कहा था कि इस एक्ट में मामला दर्ज होने पर फौरन गिरफ़्तारी नहीं होगी और प्रारंभिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना वह आदेश वापस ले लिया है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद फौरन गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला किया है.

अदालत ने 20 मार्च 2018 को एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए इसके तहत एफआईआर दर्ज होने पर बिना जांच के तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले जांच होगी और फिर गिरफ्तारी होगी.

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस  एमआर शाह और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा, ‘समानता के लिए अनुसूचित जाति और जनजातियों का संघर्ष देश में अभी खत्म नहीं हुआ है.’

पीठ ने कहा कि समाज में अभी भी इस वर्ग के लोग छुआछूत और अभद्रता का सामना सामना कर रहे हैं और वे बहिष्कृत जीवन गुजारते हैं. अदालत ने कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद15 के तहत अनुसूचित जाति और जनजातियों के लोगों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ भेदभाव हो रहा है.’

इस कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग और झूठे मामले दायर करने के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि ये जाति व्यवस्था की वजह से नहीं, बल्कि मानवीय विफलता का नतीजा है.

गौरतलब है कि अदालत के मार्च 2018 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत बिना जांच के तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने फैसला दिया था कि एससी-एसटी एक्ट के तहत कथित उत्पीड़न की शिकायत को लेकर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी और प्रारंभिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

उस आदेश के मुताबिक, मामले में अंतरिम जमानत का प्रावधान किया गया था और गिरफ्तारी से पहले पुलिस को एक प्रारंभिक जांच करनी थी. इस फैसले को गिरफ्तारी के प्रावधान को हल्का करना माना गया था और दलित संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया था.

इस फैसले से नाराज लोगों ने देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन किया था और दो अप्रैल 2018 को भारत बंद का आह्वान किया गया था. भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में 11 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

इसके बाद देश भर में बढ़ते विरोध के चलते केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) क़ानून में संशोधन विधेयक लेकर आई, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया था. कुछ सवर्ण संगठन इसके विरोध में उतरे थे.

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