Wednesday, 4 December 2019

राजीव धवन अब भी हमारे वकील, ग़लतफ़हमी के लिए माफ़ी मांगेंगे: जमीयत

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा था कि उन्हें जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के इशारे पर उनके वकील एजाज़ मकबूल द्वारा इस मामले से हटा दिया गया है.

Rajeev-Dhavan You Tube

राजीव धवन. (फोटो साभार: यूट्यूब)

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने मंगलवार रात को स्पष्टीकरण दिया कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन अब भी अयोध्या मामले में उनके वकील हैं.

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पैरवी करने वाले राजीव धवन ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा था कि वे अयोध्या मामले दायर पुनर्विचार याचिका या इस मामले से किसी तरह से नहीं जुड़े हैं क्योंकि उन्हें ‘बर्खास्त’ कर दिया गया है.

इसके बाद मंगलवार देर शाम जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जमीयत ने बताया कि इस मामले में कुछ ग़लतफ़हमी हुई है और वे धवन से माफी मांगेंगे. वहीं जमीयत के क़ानूनी सलाहकार शहीद नदीम ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि वे ऐसी बेवकूफी करने की सोच भी नहीं सकते.

नदीम ने यह भी लिखा कि जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी धवन से मिलेंगे और इस गलतफहमी को दूर करेंगे. नदीम ने यह भी लिखा कि केस को लेकर वे हमेशा धवन के कर्जदार रहेंगे.

इससे पहले धवन ने दिन में यह भी लिखा था, ‘मुझे सूचित किया गया है कि मदनी के इशारे पर मुझे इस मामले से हटा दिया गया है क्योंकि मैं अस्वस्थ हूं. यह पूरी तरह बकवास है. उन्हें मुझे हटाने के लिए अपने एओआर एजाज मकबूल को निर्देश देने का अधिकार है जो उन्होंने निर्देशानुसार किया है. लेकिन इसके लिए बताई जा रही वजह दुर्भावना से भरी और झूठी है.’

यह खबर सामने आने के बाद मुस्लिम पक्षकारों ने कहा था कि वे चाहते हैं कि धवन केस से जुड़े रहें और उन्हें हटाने का फैसला उनका नहीं बल्कि जमीयत का था. इसके बाद धवन ने कहा था कि मैं चाहूंगा कि मुस्लिम पक्षकारों को पहले अपने मतभेद सुलझाने चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एजाज़ मकबूल ने कहा कि अयोध्या मामले में दायर पुनर्विचार याचिका में धवन का नाम इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वे उपलब्ध नहीं थे. मकबूल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘यह कहना गलत है कि धवन साहब का नाम केस से इसलिए हटाया गया कि वे बीमार थे. मामला बस इतना है कि मेरे मुवक्किल (जमीयत उलेमा-ए-हिंद) खुद यह याचिका दाखिल करना चाहते थे. इस पर धवन साहब द्वारा ही काम होना था. मैं याचिका में उनका नाम इसलिए नहीं दे सका क्योंकि वे उपलब्ध नहीं थे. यह कोई बड़ी बात नहीं है.’

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