अयोध्या विवाद: रामलला के वकील ने अदालत से कहा, विवादित स्थल पर देवताओं की आकृतियां मिली हैं - Badhata Rajasthan - नई सोच नई रफ़्तार

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Friday, 16 August 2019

अयोध्या विवाद: रामलला के वकील ने अदालत से कहा, विवादित स्थल पर देवताओं की आकृतियां मिली हैं

विवादित भूमि पर मंदिर के अस्तित्व के सवाल पर रामलला के वकील की ओर से 1950 की निरीक्षण रिपोर्ट और ढांचे के भीतर देवताओं की तस्वीरों का एक एलबम भी पीठ को सौंपते हुए कहा गया कि इस तरह के चित्र मस्जिदों में नहीं बल्कि मंदिरों में होते हैं.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सातवें दिन की सुनवाई के दौरान रामलला की ओर से दलील दी गई कि विवादित स्थल पर देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से ‘रामलला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने अपनी दलीलों के समर्थन में विवादित स्थल का निरीक्षण करने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के अंश पढ़े.

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.

अयोध्या मामले की सुनवाई में जस्टिस चंद्रचूड़ ने वैद्यनाथन से कहा कि आप साबित करें कि बाबरी मस्जिद मंदिर या किसी धार्मिक इमारत के ऊपर बनी है?

इसके जवाब में वैद्यनाथन ने संविधान पीठ से कहा कि अदालत के कमिश्नर ने 16 अप्रैल, 1950 को विवादित स्थल का निरीक्षण किया था और उन्होंने वहां भगवान शिव की आकृति वाले स्तंभों की उपस्थिति का वर्णन अपनी रिपोर्ट में किया था.

वैद्यनाथन ने कहा, ‘मस्जिद के खंबों पर नहीं, बल्कि मंदिरों के स्तंभों पर ही देवी-देवताओं की आकृतियां मिलती हैं.’ उन्होंने 1950 की निरीक्षण रिपोर्ट के साथ स्तंभों पर उकेरी गई आकृतियों के वर्णन के साथ अयोध्या में मिला एक नक्शा भी पीठ को सौंपा.

उन्होंने कहा कि इन तथ्यों से पता चलता है कि यह हिंदुओं के लिए धार्मिक रूप से एक पवित्र स्थल था. वैद्यनाथन ने ढांचे के भीतर देवाओं के तस्वीरों का एक एलबम भी पीठ को सौंपा और कहा कि मस्जिदों में इस तरह के चित्र नहीं होते हैं.

एनडीटीवी के मुताबिक वैद्यनाथन ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की खुदाई और रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि वहां एक विशाल मंदिर था, जो आम जनता के दर्शन के लिए था.

रामलला की तरफ से दलीलों में सीएस वैद्यनाथन ने नक्शा और रिपोर्ट दिखाकर कोर्ट को बताया कि विवादित ढांचे और खुदाई के दौरान मिले पाषाण स्तंभ पर शिव तांडव, हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं. पक्के निर्माण में जहां तीन गुंबद बनाए गए थे वहां बाल रूप में राम की मूर्ति थी.

वैद्यनाथन ने कहा कि अप्रैल 1950 में विवादित क्षेत्र का निरीक्षण हुआ तो कई पक्के साक्ष्य मिले. इसमें नक्शे, मूर्तियां, रास्ते और इमारतें शामिल हैं. परिक्रमा मार्ग पर पक्का और कच्चा रास्ता बना था. आसपास साधुओं की कुटिया थीं. सुमित्रा भवन में शेषनाग की मूर्ति मिली. पुरातत्व विभाग की जनवरी 1990 की जांच और रिपोर्ट में भी कई तस्वीरें और उनके साक्ष्य दर्ज हैं. 11 रंगीन तस्वीरें उस रिपोर्ट के एलबम में हैं, जिनमे स्तंभों की नक्काशी का विवरण, चित्रण और वर्णन है.

वैद्यनाथन ने एएसआई की रिपोर्ट वाले एलबम की तस्वीरें, मेहराब और कमान की तस्वीरें भी कोर्ट को दिखाईं, जो 1990 में खींची गई थीं. उसमें कसौटी पत्थर के स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि उत्कीर्ण है. तस्वीरों में भी साफ-साफ दिखता है. कमिश्नर की रिपोर्ट में पाषाण स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि यात्रा भी लिखा है.

जस्टिस भूषण ने कहा, ‘1990 की फोटो की तुलना में 1950 में कमीशन द्वारा लिया गया फोटो, जो जगह के बारे में है, बताता है वो ज्यादा भरोसेमंद है.’ रामलला की तरफ से कहा गया कि इसमें कोई विवाद नही कि वहां खंबे मौजदू थे.

वैद्यनाथन ने कहा, ‘सिर्फ नमाज़ अदा करने से वह जगह उनकी नहीं हो सकती, जब तक वह आपकी संपत्ति न हो. नमाज सड़कों पर भी होती है इसका मतलब यह नहीं कि सड़क आपकी हो गई.’

वैद्यनाथन ने आगे कहा कि मस्जिद में मानवीय या जीव-जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकती हैं, मस्जिदें सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए होती हैं.

शीर्ष अदालत इस समय अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि के मालिकाना हक के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

बता दें कि अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने में सफलता नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट छह अगस्त से इसकी रोजाना सुनवाई कर रहा है.

हालांकि, मुस्लिम पक्षकार एम.सिद्दीक और आल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सप्ताह के सभी पांच कार्य दिवसों पर इसकी सुनवाई किए जाने पर आपत्ति की थी, लेकिन संविधान पीठ ने इसे अस्वीकार कर दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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