Friday, 8 November 2019

महाराष्ट्र: फड़णवीस ने पद छोड़ा, उद्धव बोले- शाह की मौजूदगी में सीएम पद साझा करने का वादा किया था

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शिवसेना के दावों को ख़ारिज करते हुए देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि उनकी मौजूदगी में कोई फैसला नहीं लिया गया कि दोनों दल मुख्यमंत्री पद साझा करेंगे.

भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: शिवसेना के आक्रामक तेवरों से गठबंधन सरकार के किसी भी प्रयास के परवान नहीं चढ़ने के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा दे दिया है.

49 वर्षीय फड़णवीस ने राजभवन जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफा सौंपा, जिन्होंने वैकल्पिक इंतजाम होने तक उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है.

वहीं शिवसेना ने इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री को मीडिया से बातचीत करते हुए देख चिंता हो रही है. वहीं पार्टी नेता संजय राउत ने कहा कि अगर देवेंद्र फड़णवीस विश्वस्त हैं कि भाजपा राज्य में दोबारा सरकार बनाएगी तो उन्हें हमारी शुभकामनाएं हैं.

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि अमित शाह के साथ उनकी बातचीत के दौरान पार्टी महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद साझा करने पर सहमत हुई थी.

मालूम हो कि राज्य में 21 अक्टूबर को हुए चुनावों के नतीजे आने के एक पखवाड़े बाद तक गठबंधन सहयोगी भाजपा और शिवसेना के बीच गतिरोध बरक़रार है.

उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दल भाजपा को, उन्हें झूठा साबित करने के प्रयास के लिए आड़े हाथों लिया और दावा किया कि अमित शाह के साथ उनकी बातचीत के दौरान पार्टी महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद साझा करने पर सहमत हुई थी.

ठाकरे ने कहा कि वह अपने पिता एवं शिवसेना संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे से राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बारे में किया वादा पूरा करेंगे. ठाकरे ने कहा कि उन्हें इसके लिए देवेंद्र फड़णवीस या अमित शाह की जरूरत नहीं है.

ठाकरे ने देवेंद्र फड़णवीस द्वारा अपना इस्तीफा महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सौंपने के कुछ ही देर बाद मीडिया को संबोधित किया.

ठाकरे ने फड़णवीस के इस दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई कि मुख्यमंत्री पद के ढाई-ढाई साल बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था. ठाकरे ने एक बार फिर कहा कि उन्हें इससे ठेस लगी है कि भाजपा ने उन्हें एक झूठे के तौर पर पेश करने का प्रयास किया.

उद्धव ने कहा कि उन्होंने 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के साथ बातचीत नहीं की, क्योंकि वह यह बर्दाश्त नहीं कर सकते थे कि उन्हें झूठा कहा जाए.

शिवसेना प्रमुख ने फड़णवीस के इस दावे से भी इनकार किया कि शिवसेना नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया.

ठाकरे ने कहा कि उन्होंने मोदी पर निशाना नहीं साधा, लेकिन राजग सरकार की समय समय पर नीतियों को लेकर आलोचना की.

महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव परिणाम आए एक पखवाड़ा बीत चुका है लेकिन राज्य में सरकार गठन को लेकर आगे का कोई रास्ता नहीं निकल पा रहा है.

भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है. इससे गतिरोध उत्पन्न हो गया है, जबकि दोनों दलों के गठबंधन को कुल मिलाकर 161 सीटें आई हैं. 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 का है.

राज्य में 21 अक्टूबर को हुए चुनावों में 105 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी भाजपा और 56 सीटें जीतने वाली उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अब तक साथ-साथ या अलग-अलग सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है.

इधर, शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, ‘मुख्यमंत्री अगर कह रहे हैं कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में एक बार फिर भाजपा सरकार होगी तो मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं. लोकतंत्र में जिसके पास बहुमत होता है वह सरकार बनाता है और मुख्यमंत्री पद उसे मिलता है.’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘अपनी पार्टी की तरफ से मैं भी कहता हूं कि अगर हम चाहते तो सरकार बना सकते हैं और शिवसेना का मुख्यमंत्री हो सकता है.’

नतीजे आने के एक पखवाड़े बाद भी सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध पर राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि राज्यपाल सबसे ज्यादा सीट वाले दल को बुला क्यों नहीं रहे हैं.

पवार ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि राज्यपाल कोश्यारी भाजपा को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए आमंत्रित क्यों नहीं कर रहे हैं, जो 105 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है.

इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार को पवार से मुलाकात की और महाराष्ट्र में सरकार गठन पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए उनसे सलाह मांगी.

मुलाकात के बाद पवार ने पत्रकारों से अठावले के जरिये कहा कि भाजपा और शिवसेना को लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करना चाहिए.

पवार ने कहा, ‘महाराष्ट्र जैसे राज्य में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए. उन्होंने (अठावले ने) सलाह मांगी थी. हमारी आम राय थी कि लोगों ने भाजपा और शिवसेना को स्पष्ट बहुमत दिया है.’

पवार ने कहा कि राष्ट्रपति या राज्यपाल कब तक इंतजार कर सकते हैं, उन्हें कुछ फैसला लेना होगा.

पद छोड़ने के बाद फड़णवीस ने कहा- शिवसेना ने कांग्रेस-राकांपा से बात की

राज्यपाल से मुलाकात के बाद फड़णवीस ने संवाददाताओं से कहा, ‘वैकल्पिक व्यवस्था कुछ भी हो सकती है, वो नई सरकार हो सकती है या राष्ट्रपति शासन लगना भी हो सकता है.’

फड़णवीस ने कहा, ‘राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. मैं पांच सालों तक सेवा करने का मौका देने के लिए महाराष्ट्र के लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं.’

फड़णवीस ने विधानसभा चुनावों के बाद सरकार गठन में गतिरोध को लेकर सहयोगी शिवसेना पर निशाना साधा.

शिवसेना के दावों को खारिज करते हुए फड़णवीस ने कहा कि उनकी मौजूदगी में कोई फैसला नहीं लिया गया कि दोनों दल मुख्यमंत्री पद साझा करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘मैं एक बार फिर यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह कभी तय नहीं किया गया कि मुख्यमंत्री पद साझा किया जाएगा. इस मुद्दे पर कभी फैसला नहीं लिया गया. यहां तक कि अमित शाह जी और नितिन गडकरी जी ने कहा कि यह फैसला कभी नहीं लिया गया था.’

फड़णवीस ने कहा कि उन्होंने गतिरोध तोड़ने के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन किया लेकिन उद्धव जी ने उनका फोन नहीं उठाया.

उन्होंने कहा कि भाजपा से बात नहीं करने और विपक्षी कांग्रेस और राकांपा से बात करने की शिवसेना की नीति गलत थी.

फड़णवीस ने कहा, ‘जिस दिन नतीजे आए, उद्धव जी ने कहा कि सरकार गठन के लिए सभी विकल्प खुले हैं. यह हमारे लिए झटके जैसा था, क्योंकि लोगों ने हमारे गठबंधन के लिए जनादेश दिया था और ऐसी परिस्थितियों में हमारे लिए यह बड़ा सवाल था कि उन्होंने यह क्यों कहा कि उनके लिए सभी विकल्प खुले हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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