Monday, 4 November 2019

आईपीएस अधिकारी के फोन टैपिंग पर कोर्ट का कड़ा रूख, कहा- क्या किसी के लिए निजता नहीं बची

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सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के फोन टैप कराने को लेकर ये टिप्पणी की है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के फोन टैप कराने की छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई पर सोमवार को कड़ा रूख अपनाया और कहा, ‘क्या किसी के लिए निजता नहीं बची है.’

शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार से जानना चाहा कि क्या इस तरह से किसी भी व्यक्ति के निजता के अधिकार का हनन किया जा सकता है. जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने राज्य सरकार को सारे मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.

इस हलफनामे में यह भी स्पष्ट करना होगा कि फोन की टैपिंग का आदेश किसने दिया और किन कारणों से दिया ? पीठ ने सख्त लहजे में कहा, ‘इस तरह से करने की क्या आवश्यकता है? किसी के लिए कोई निजती बची ही नहीं है. इस देश में आखिर क्या हो रहा है? क्या किसी व्यक्ति की निजता का इस तरह हनन किया जा सकता है? किसने यह आदेश दिया? विस्तृत हलफनामा दाखिल करें.’

पीठ ने शीर्ष अदालत में आईपीएस अधिकारी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दायर किये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की और अधिवक्ता के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी.

पीठ ने कहा कि इस मामले में अगले आदेश तक कोई दण्डात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा. पीठ ने आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी से कहा कि इस मामले में छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम घसीट कर इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाये.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका में पक्षकारों की सूची से मुख्यमंत्री का नाम हटा दिया जाये.वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भी एक प्रतिवादी बनाया है.

बार एंड बेंच के मुताबिक, गुप्ता ने याचिका दायर कर मांग की है कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दायर किए गए एफआईआर की जांच सीबीआई को ट्रांसफर की जाए.

गुप्ता, जो आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के महानिदेशक थे, ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के इशारे पर राज्य मशीनरी द्वारा लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

याचिका में कहा गया है कि गुप्ता ने ईओडब्ल्यू के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दो सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक अपराधों- नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला और आलोक अग्रवाल मामले- के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले में राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया था, जबकि आलोक अग्रवाल मामला सिंचाई विभाग के एक कार्यकारी अभियंता द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित था.

कोर्ट शुक्रवार को मामले की अगली सुनवाई के लिए तैयार हो गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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